Yaadein


सूनी सी एक राह,

उस पर गहरें से कुछ निशा,
किसी की सहमी हुई यादों के..

सिसकते हुए कुछ वादों के..
दर्द से करहाती हुई रौशनी...

धुंए में धुंदलाती से एक ख़ुशी..

आँखों को भिगोती हुई कुछ बूँदी..
कानो से गुजरती हुई कुछ अवाज़ी..

किसी के आने की वह आहत...

वक़्त के रुक जाने की वह चाहत..

वह डूबता हुआ सूरज..
वह शरमाते हुए सितारे..

सूखे पत्तों से खेलती हुई वह हवा...

खिड़की से झांकती हुई वह रातें..

चुपके से याद आती हुई वह बातें..
आसमान को छूने की वह कोशिश..

किसी को पाने की वह खुवाईश

हाथों में सिमटी सी एक लकीर..

आँखों मैं चिप्पि सी एक तस्वीर..
वह खुद ही रूठना..

वह खुद ही मानना..

वह मुट्ठी में बंद कुछ सपने..

वह बिछडी हुए कुछ अपने..
गुजरता हुआ हर पल यही..

बहका हुआ कुछ-कुछ कहीं..

खामोश सी है लहरैं सभी..

खो गयी ज़िन्दगी कहीं..
थम सा गया सब कुछ..

पर वक़्त है पता नहीं कुछ..

हु आज भी 'मैं' वहीँ-कहीं...

और 'तुम' शायद कहीं नहीं कहीं नहीं...

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